तुम मेरे साथ में आओ तो कोई बात बने
और आकर के न जाओ तो कोई बात बने
घाव पर घाव दिए जाते हो केवल तुम तो
इन पे मरहम भी लगाओ तो कोई बात बने
दर्द बेज़ार किए देता है मुझको अब तो
अपने सीने से लगाओ तो कोई बात बने
मयक़दे जा के भी लौटा हूँ मैं इतना प्यासा
तुम जो आँखों से पिलाओ तो कोई बात बने
हर किसी पर तो न आएगा ये बेदर्दी दिल
हाँ जो तुम पास बुलाओ तो कोई बात बने
'नित्य' दरिया है वो ख़ुद राह बना लेगा मगर
तुम पता दिल का बताओ तो कोई बात बने
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