vo jab se dil men utar ga.e hain | वो जब से दिल में उतर गए हैं

  - Nityanand Vajpayee

वो जब से दिल में उतर गए हैं
हम और भी कुछ सँवर गए हैं

मिज़ाज में है अजीब शोख़ी
उसी में खो कर बिखर गए हैं

कली हज़ारों हैं गुलशनों में
मगर उन्हीं पर ठहर गए हैं

पढ़ा उन्होंने ख़याल मेरा
तो खिल के कितना निखर गए हैं

गुलाब की पंखुड़ी मुकम्मल
पे उनके कमसिन अधर गए हैं

वहीं हैं अब तक जहाँ मिले थे
इधर रुके हैं उधर गए हैं

है नित्य उनका इलाज ही क्या
जो मर गए या मुकर गए हैं

  - Nityanand Vajpayee

More by Nityanand Vajpayee

As you were reading Shayari by Nityanand Vajpayee

Similar Writers

our suggestion based on Nityanand Vajpayee

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari