ज़िंदगी बस ज़िंदगी इतनी बनानी रह गई

बन गए किरदार सारे बस कहानी रह गई

छोड़ कर तहज़ीब जब बस बद-ज़बानी रह गई
तो कहो किस काम की फिर नौजवानी रह गई

अक़्ल दौलत दोस्ती सब लापता सा हो गया इश्क़ में अब महज़ मेरी जान जानी रह गई

तितलियाँ हक़दार गुलशन के सभी फूलों की थीं
जुगनुओं की क़िस्मतों में रात-रानी रह गई

वो बुज़ुर्गों की बताई तो कहीं मिलती नहीं
अब दुखों को झेलती ही बस जवानी रह गई

— Parul Singh "Noor"

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