फूल बातें कर रहा था पंखुड़ी के साथ
आदमी कितना बुरा है आदमी के साथ
हम सफ़र की ग़लतियों पे हँस के आना पेश
अक़्ल की मौजूदगी है सादगी के साथ
दोस्ती में माँ बहन की गालियाँ बकना
सब सेे गन्दी ज़्यादती है दोस्ती के साथ
मुस्कुराने के लिए मत देखना कारण
ज़िंदगी का नाम है जीना कमी के साथ
फिर हमारे जीने का मतलब ही क्या होगा
आप गरचे जाएँगे नाराज़गी के साथ
वक़्त के उलझाव में रिश्तों को खो देना
सब सेे गहरा हादसा है इस सदी के साथ
अर्श पे अल्लाह है अंबर में है भगवान
और ज़मीं पे आदमी है आदमी के साथ
इस के आगे अक़्ल का भी दम नहीं चलता
सब सेे अच्छी बात है दीवानगी के साथ
भाग्य में चाहे हमारे जो भी लिक्खा हो
अब तो जीना और मरना है उसी के साथ
तुम मुझे इक बार बस आवाज़ दे देना
मैं खड़ा हो जाऊँगा अपनी हँसी के साथ
दौड़ती दुनिया के पीछे दौड़ते जाना
अक़्ल की आवारगी है आदमी के साथ
आप किस मुॅंह से नसीहत कर रहें राकेश
आपकी भी दोस्ती है फुलझड़ी के साथ
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