लोग उस पर ही फिसलते हैं
रास्ते जो सीधे चलते हैं
ले गया जब फूल भौंरा तो
गुल-फ़िशाँ अब हाथ मलते हैं
अपने दम पर है मुकम्मल हम
लोग फिर भी हम से जलते हैं
शाह जब नाकाम बन बैठे
नाम शहरों के बदलते हैं
— Rizwan Khoja "Kalp"
रास्ते जो सीधे चलते हैं
ले गया जब फूल भौंरा तो
गुल-फ़िशाँ अब हाथ मलते हैं
अपने दम पर है मुकम्मल हम
लोग फिर भी हम से जलते हैं
शाह जब नाकाम बन बैठे
नाम शहरों के बदलते हैं
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