ilaaj-e-ishq musalsal jo kar ga.e hote | इलाज-ए-इश्क़ मुसलसल जो कर गए होते

  - SALIM RAZA REWA

इलाज-ए-इश्क़ मुसलसल जो कर गए होते
दिलों के ज़ख़्म यक़ीनन ही भर गए होते

तुम्हारे 'इश्क़ ने हमको बचा लिया वर्ना
ग़म-ए-हयात से अब तक तो मर गए होते

इसी ख़याल ने पागल बना के रक्खा है
तुम्हारे साथ जो रहते सँवर गए होते

ज़रा सी देर की ख़ातिर जो तुम ठहर जाते
मेरे ग़मों के भी चेहरे उतर गए होते

तुम्हारे प्यार का मरहम जो मिल गया होता
तो मेरे दिल के सभी ज़ख़्म भर गए होते

तुम्हारी याद की बारिश जो हो गई होती
तो सूखे अश्क भी आँखों से झर गए होते

  - SALIM RAZA REWA

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