ख़ाक का है पुतला इंसाँ ख़ाक में मिल जाएगाकैसी दौलत कैसी शोहरत क्यूँ भला मग़रूर हैवक़्त से पहले किसी को कुछ नहीं मिलता कभीवक़्त के हाथों यहाँ हर एक शय मजबूर है— SALIM RAZA REWA