मेरी तरह वो भी हिम्मत दिखलाएँ तो
खुल्लम-खुल्ला मुझ से मिलने आएँ तो
आँखों को कुछ सुस्ताने की मुहलत दो
रस्ता तकते तकते गर थक जाएँ तो
मन की प्यास रफ़ूचक्कर हो जाएगी
आँखों के पनघट पे मिलने आएँ तो
फिर मैं सजदा करते करते आऊँगा
अपने दर पर मुझको कभी बुलाएँ तो
चाहत पर शबनम की बूँदें मल देना
प्यार की साँसें जिस दम मुरझा जाएँ तो
ख़्वाबों में आग़ाज़ मिलन का कर देंगे
अब तो मिलन पर पहरे लोग बिठाएँ तो
शाम से ही बैठे हैं जाम रज़ा लेकर
यादें उनकी आ कर हमें सताएँ तो
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