होली

रुठो नईं सरकार कि होली आई है
झूम रहा संसार कि होली आई है

होली के दिन बड़ों का आशीर्वाद रहे
छोटों के संग होली के पल याद रहे
हर मज़हब के लोग ख़ुशी में खोए हैं
रंगों का त्योहार कि होली आई है

साजन हैं परदेश न भाए रंग अबीर
गोरी के आँखों से बहते झर-झर नीर
सजनी ने साजन को लिखकर भेजा है
तुम बिन नहीं क़रार कि होली आई है

होली के दिन बदला हर रुख़सार लगे
रंग -बिरंगा आज मेरा दिलदार लगे
पी कर भांग हैं झू
में फाग की टोली में
उड़ती रंग फुहार कि होली आई है

— SALIM RAZA REWA

More by SALIM RAZA REWA

Other nazm from the same pen

See all from SALIM RAZA REWA →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling