sun kar kiya hai ansuna aurat ke dard ko | सुन कर किया है अनसुना औरत के दर्द को

  - shampa andaliib

सुन कर किया है अनसुना औरत के दर्द को
कोई नहीं समझ सका औरत के दर्द को

मर्दों ने हँसना बोलना सीखा इन्हीं से और
ता-उम्र समझा क़हक़हा औरत के दर्द को

मज़लूम अपने हक़ के लिए भी न लड़ सकी
हर आदमी दबा रहा औरत के दर्द को

हम ने इबादतों में बताया तो था मगर
रब भी नहीं समझ सका औरत के दर्द को

रफ़्तार-ए-ज़िंदगी ने किया सब इधर उधर
क्यूँँ वक़्त कम न कर रहा औरत के दर्द को

छोटा सा ज़ख़्म बन गया नासूर एक दिन
जब वक़्त पर नहीं सुना औरत के दर्द को

औरत का दर्द जाइए औरत से पूछिए
अब मर्द से न पूछना औरत के दर्द को

  - shampa andaliib

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