कुछ एक तरफ़ ध्यान ज़ियादा है किसी का
लगता है कि दिल टूटने वाला है किसी का
पहले भी हुआ 'इश्क़ कई बार तो क्या है
बस याद ये रखना कि ये पहला है किसी का
इक वक़्त था यारों में घिरे रहते थे हर दम
अब बोलना अच्छा नहीं लगता है किसी का
उठते हुए बिस्तर से बहुत डर ने लगा हूँ
हर काम मेरा काम बढ़ाता है किसी का
कल दूसरा रूठा था कोई ऐसी ख़ता पर
अब तेरी जगह नाम पुकारा है किसी का
इक और भी 'शारिक़' अभी करना है हमें जुर्म
अब अपनी जगह नाम भी लेना है किसी का
As you were reading Shayari by Shariq Kaifi
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