फिर न तड़पाएगी ये रात चलो साथ चलें
तुम पकड़ लो न मेरा हाथ चलो साथ चलें
साथ चलना ही बस इक हल है मसाइल का सनम
सब बदल जाएँगे हालात चलो साथ चलें
सामना इस का अकेले नहीं कर पाऊँगा
तेज़ होने लगी बरसात चलो साथ चलें
वहशत-ए-उम्र-ए-रवाँ क़हर-बपा है यूँ भी
चाहता हूँ मैं तेरा साथ चलो साथ चलें
ज़िंदगानी का सफ़र तन्हा कटा है किस से
मान जाओ न मेरी बात चलो साथ चलें
कितने बेताब हैं मिलने को बिछड़ कर फिर से
देखिए अर्ज़-ओ-समावत चलो साथ चलें
शब-ए-हिज्राँ के सितम टूट पड़ेंगे तुम पर
होगा मुश्किल गुज़र-औक़ात चलो साथ चलें
दूरियाँ फ़ासले रंजिश कि मुसावात 'शिवांग'
हैं बिछड़ने की अलामात चलो साथ चलें
— Shivang Tiwari















