तू किसी बज़्म में मिली जब सेशा'इरी मैं ने की शुरू तब सेयाद आई तो आँखें धो लूँगासोच कर मैं भी जग रहा शब सेशा'इरी मुझ को भी कहाँ आतीखेल चलता है लब के करतब सेइश्क़ है काम क्या कहूँ तुम सेचैन आता है उस के ख़ुश-लब से— Shivang Tiwari