तू किसी बज़्म में मिली जब से
शा'इरी मैं ने की शुरू तब से
याद आई तो आँखें धो लूँगा
सोच कर मैं भी जग रहा शब से
शा'इरी मुझ को भी कहाँ आती
खेल चलता है लब के करतब से
इश्क़ है काम क्या कहूँ तुम से
चैन आता है उस के ख़ुश-लब से
— Shivang Tiwari
शा'इरी मैं ने की शुरू तब से
याद आई तो आँखें धो लूँगा
सोच कर मैं भी जग रहा शब से
शा'इरी मुझ को भी कहाँ आती
खेल चलता है लब के करतब से
इश्क़ है काम क्या कहूँ तुम से
चैन आता है उस के ख़ुश-लब से
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