ग़मों से चूर होना चाहता हूँ
मैं तुम से दूर होना चाहता हूँ
मुझे आसाइशें दुख दे रही हैं
ज़रा मजबूर होना चाहता हूँ
मज़ाहिब का निशाना ले लिया है
ज़रा मशहूर होना चाहता हूँ
तुम्हारे शहर वालों में वफ़ा का
कोई दस्तूर होना चाहता हूँ
मुझे सादा-दिली तड़पा रही है
ज़रा मग़रूर होना चाहता हूँ
अँधेरों से मेरा रिश्ता नहीं है
मैं अब पुर-नूर होना चाहता हूँ
जहाँ भर की निगाहों में रहूँगा
मैं कोह-ए-तूर होना चाहता हूँ
ज़ियादा कुछ नहीं माँगा ख़ुदा से
तेरा सिंदूर होना चाहता हूँ
ख़बर तो हो मशक़्क़त की मुझे भी
कोई मज़दूर होना चाहता हूँ
तुम्हारी हाँ मुझे काफ़ी नहीं है
उसे मंज़ूर होना चाहता हूँ















