ghamon se choor hona chahta hooñ | ग़मों से चूर होना चाहता हूँ

  - Shivang Tiwari

ग़मों से चूर होना चाहता हूँ
मैं तुम सेे दूर होना चाहता हूँ

मुझे आसाइशें दुख दे रही हैं
ज़रा मजबूर होना चाहता हूँ

मज़ाहिब का निशाना ले लिया है
ज़रा मशहूर होना चाहता हूँ

तुम्हारे शहर वालों में वफ़ा का
कोई दस्तूर होना चाहता हूँ

मुझे सादा-दिली तड़पा रही है
ज़रा मग़रूर होना चाहता हूँ

अँधेरों से मेरा रिश्ता नहीं है
मैं अब पुर-नूर होना चाहता हूँ

जहाँ भर की निगाहों में रहूँगा
मैं कोह-ए-तूर होना चाहता हूँ

ज़ियादा कुछ नहीं माँगा ख़ुदास
तेरा सिंदूर होना चाहता हूँ

ख़बर तो हो मशक़्क़त की मुझे भी
कोई मज़दूर होना चाहता हूँ

तुम्हारी हाँ मुझे काफ़ी नहीं है
उसे मंज़ूर होना चाहता हूँ

  - Shivang Tiwari

More by Shivang Tiwari

As you were reading Shayari by Shivang Tiwari

Similar Writers

our suggestion based on Shivang Tiwari

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari