muhabbat ka zamaana chal raha hai | मुहब्बत का ज़माना चल रहा है

  - Shivang Tiwari

मुहब्बत का ज़माना चल रहा है
जहाँ देखो दिवाना चल रहा है

कभी फ़ुर्सत मिली तो हम मिलेंगे
वही बासी बहाना चल रहा है

यहीं मैदान था कुछ साल पहले
जहाँ अब कारख़ाना चल रहा है

झरोखे से वही आवाज़ आई
वो देखो फिर दिवाना चल रहा है

न कोई दोस्त है उसका न दुश्मन
वहाँ कोई सयाना चल रहा है

किताबें साथ चलती है मिरे जब
तो लगता है ख़ज़ाना चल रहा है

ज़मीं के वास्ते है जंग हर-सू
महाभारत पुराना चल रहा है

  - Shivang Tiwari

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