मुहब्बत का ज़माना चल रहा है
जहाँ देखो दिवाना चल रहा है
कभी फ़ुर्सत मिली तो हम मिलेंगे
वही बासी बहाना चल रहा है
यहीं मैदान था कुछ साल पहले
जहाँ अब कारख़ाना चल रहा है
झरोखे से वही आवाज़ आई
वो देखो फिर दिवाना चल रहा है
न कोई दोस्त है उस का न दुश्मन
वहाँ कोई सयाना चल रहा है
किताबें साथ चलती है मिरे जब
तो लगता है ख़ज़ाना चल रहा है
ज़मीं के वास्ते है जंग हर-सू
महाभारत पुराना चल रहा है
— Shivang Tiwari















