ज़िन्दगी यूँँ बिता रहा हूँ मैंदूर ख़ुद से ही जा रहा हूँ मैंकल को बेहतर बनाने की ख़ातिरआज को भी गँवा रहा हूँ मैं— Shivang Tiwari