देखिए कैसी बे-हयाई है
ज़िन्दगी मुझ पे मुस्कुराई है
कितनी उम्मीद लेके आई है
मेरी बेटी मेरी कमाई है
बात निकलेगी तो बढ़ेगी ही
चुप ही रहने में अब भलाई है
क्या करूँँ कुछ समझ नहीं आता,
है कुआँ आगे पीछे खाई है।
फायदा हो रहा किसी का, तो
झूठ कहने में क्या बुराई है
जिसकी ख़ातिर मैं छोड़ आया सब
आज उस लड़की की सगाई है
अब नशा उतरेगा नहीं जल्दी
उसने आँखों से जो पिलाई है
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