yaar ab kaise kahooñ kaise hua barbaad main | यार अब कैसे कहूँ कैसे हुआ बर्बाद मैं

  - Shivang Tiwari

यार अब कैसे कहूँ कैसे हुआ बर्बाद मैं
रोज़ करता था नए ग़म को यहाँ ईजाद मैं

पहले लगता था बहुत ही ख़ास हूँ सबके लिए
अब तो लगता है किसी को भी नहीं हूँ याद मैं

उलझनें तो हैं मगर इस
में मज़ा कम भी नहीं
कैद हूँ ख़ुद में ज़माने से हुआ आज़ाद मैं

ज़िंदगी भर ज़िंदगी को मैं लिखूँ खाई क़सम
और इक दिन बन गया अपने लिए इरशाद मैं

मुश्किलें होंगी यहाँ कमज़ोर जाँ हम भी नहीं
फिर नई सी शाख़ सा हो जाऊँगा आबाद मैं

  - Shivang Tiwari

Friendship Shayari

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