तल्ख़ बातों को छुपाता हूँ तो रो देता हूँ
जब मैं कुछ कह नहीं पाता हूँ तो रो देता हूँ
हौसला साथ नहीं देता कि मैं होंठों पर
जब भी मुस्कान सजाता हूँ तो रो देता हूँ
मैं ने देखा है कई बार किसी को जब भी
अपनी रू-दाद सुनाता हूँ तो रो देता हूँ
क्या लड़कपन था कि अब उस की तसावीर के साथ
अपनी सूरत को मिलाता हूँ तो रो देता हूँ
क्या यही हूँ मैं जो बचपन में हुआ करता था
अब जो आईना उठाता हूँ तो रो देता हूँ
जाने क्या याद दिलाते हैं ये स्कूल शिवांग
इन की जानिब कभी जाता हूँ तो रो देता हूँ
— Shivang Tiwari















