भूलना हो तो भूल जाना मुझे
अपनी नज़रों से मत गिराना मुझे
आज अपने ही आप में गुम हूँ
फिर किसी रोज़ याद आना मुझे
इन दिनों तो ख़ुदा भी है नाराज़
ऐसे आलम में मत सताना मुझे
गर भरोसा नहीं हो मुझ पर तो
अब कोई बात मत बताना मुझे
आए हो तो क़रीब आ जाओ
दूर से देख के न जाना मुझे
ताकि ख़ुद को बदल सकूँ थोड़ा
ऐब सारे मिरे बताना मुझे
— Sohil Barelvi















