ik nazar bhi na mujhe dekhe zamaana jaanaan | इक नज़र भी न मुझे देखे ज़माना जानाँ

  - Sohil Barelvi

इक नज़र भी न मुझे देखे ज़माना जानाँ
ऐसी हालत में नहीं छोड़ के जाना जानाँ

जो छुपाने की हो वो बात छुपाना लेकिन
जो बताने की हो वो बात बताना जानाँ

अब तू अपनाए या ठुकराए तेरे हाथों में
अब कहीं भी नहीं है मेरा ठिकाना जानाँ

इस दफ़ा जान हथेली पे रखी है मेरे
अब क़दम सोच समझकर ही उठाना जानाँ

मेरी आँखों में फ़क़त ख़ून बचा है अब तो
अब कोई ख़्वाब नहीं मुझ को दिखाना जानाँ

कुछ भी हो जाए मगर इतने मरासिम रखना
काम पड़ जाए तो नज़रें न चुराना जानाँ

मुझ को डर है मैं तेरे सामने रोने न लगूँ
मेरे हालात नहीं मुझ को बताना जानाँ

और लोगों की तरह तुम न परेशाँ करना
राह भूलूँ तो मुझे राह दिखाना जानाँ

जिन को अपना तू समझता है मुकर जाएँ अगर
एक आवाज़ मुझे भी तू लगाना जानाँ

  - Sohil Barelvi

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