जो वादे किए हैं निभाते रहेंगे
मोहब्बत की लौ को बढ़ाते रहेंगे
तू चाहे न चाहे मगर हम मुसलसल
तुझे याद आए हैं आते रहेंगे
चलो कितनी चालें चलोगे रक़ीबों
तुम्हें आइना हम दिखाते रहेंगे
कोई तो ज़माने में होगा हमारा
जिसे दर्द दिल का सुनाते रहेंगे
नहीं होगा तू तो ये तस्वीर तेरी
कलेजे से अपने लगाते रहेंगे
मोहब्बत के मज़दूर हैं हम तो सोहिल
कमाते रहे हैं कमाते रहेंगे
— Sohil Barelvi















