थोड़ा तो हो ले शाद मोहब्बत से पेश आ
ऐ शहर-ए-ना-मुराद मोहब्बत से पेश आ
चलती रहेगी दुश्मनी ऐसे तो 'उम्र भर
अब ख़त्म कर तज़ाद मोहब्बत से पेश आ
मुझ को तो कार-ए-इश्क़ ने बिल्कुल बदल दिया
तू भी रहेगा शाद मोहब्बत से पेश आ
दुनिया बुरी नहीं है बुरा वक़्त है तिरा
रख ख़ुद पे एतिमाद मोहब्बत से पेश आ
दुश्मन को मुस्कुरा के मोहब्बत का दर्स दे
होगा नहीं फ़साद मोहब्बत से पेश आ
अपने गुज़िश्ता वक़्त से चुन बस हसीन पल
फिर सब से इस के बाद मोहब्बत से पेश आ
जो हो चुका है तू उसे सोहिल भुला दे और
कुछ भी न कर तू याद मोहब्बत से पेश आ
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