किसी इल्हाम की सूरत हुआ है
मेरा जो भी ख़ुदास राब्ता है
मेरा अर्ज़-ओ-समा से राब्ता है
ये मुझ को छोड़ कर सब को पता है
मुसीबत के पहाड़ों पर खड़ा हूँ
मेरा क़द आपके क़दस बड़ा है
हमारे जिस्म तक आओ हसीनों
मोहब्बत के नए घर का पता है
उदासी हिज्र का दुख नम निगाहें
हमें भी ज़िंदगी से सब मिला है
सभी के साथ हँसता था जो लड़का
वो अब तन्हाई में रोने लगा है
सितारा-साज़ पलकें हैं हमारी
हज़ारों ख़्वाहिशों का दम रुका है
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