फ़क़त कहने को ज़िंदा हो गया है
अगर बीमार अच्छा हो गया है
कोई अपना पराया हो गया है
ख़सारे में इज़ाफ़ा हो गया है
हमारे हाथ जब से कट गए हैं
बहुत कमज़ोर शाना हो गया है
मैं वो पत्थर जिगर वाला हूँ जिस को
किसी से 'इश्क़ सच्चा हो गया है
यही बस पूछना है मन की कर के
तुम्हारा दिल तो हल्का हो गया है
कोई बदलाव होने से रहा अब
जो होना था वो कब का हो गया है
हमारी ही दुआ में कुछ कमी है
मगर तुम ने जो चाहा हो गया है
बहलते हैं कई दिल इस के दम पर
हमारा दिल खिलौना हो गया है
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