jahaan tu hai vahaañ par har KHushi hai | जहाँ तू है वहाँ पर हर ख़ुशी है

  - Sohil Barelvi

जहाँ तू है वहाँ पर हर ख़ुशी है
मिरी जाँ तू बहार-ए-ज़िंदगी है

न जाने क्यूँँ मुझे भी लग रहा है
मोहब्बत से बड़ी शय दोस्ती है

बरस कर ख़ुश्क तू तो हो चुका है
मिरे लब पर अभी तक तिश्नगी है

तिरी तस्वीर को मैं देखता हूँ
तिरी तस्वीर मुझ को देखती है

अभी हाथों को मेरे छोड़ना मत
ज़रा सी देर की बस तीरगी है

मोहब्बत आप की दे कर ख़ुदा ने
कमी पैदाइशी पूरी करी है

हमारे ज़ख़्म का चारा नहीं है
हमारे पास केवल शाइरी है

  - Sohil Barelvi

Zakhm Shayari

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