सोचता हूँ वो कहाँ इतनी बुरी है
दोस्तों जितनी बुरी ये ज़िंदगी है
हाँ कभी उसके लिए ग़ज़लें लिखी थीं
आज जिसको कह रहा हूँ मैं बुरी है
वो गई है छोड़ कर जब से मुझे दोस्त
तब से चेहरे पर मेरे झूठी हँसी है
एक उसके यूँँ चले जाने से मेरी
ज़िंदगी पूरी तरह से रुक चुकी है
दोस्त मेरी ज़िंदगी बर्बाद करके
वो किसी से फिर मोहब्बत कर रही है
दोस्त मेरे साथ जो तस्वीर में है
अब वो लड़की ज़िंदगी से जा चुकी है
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