Krishna Mishra

Krishna Mishra

@mishrakaanhaa

Krishna Mishra shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Krishna Mishra's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

हम ने तेरी याद को ज़रिया बना रक्खा है याद जिस ने बूँद को दरिया बना रक्खा है — Krishna Mishra
ख़ुद तो क्यूँ गुमनाम थे गर करना ही था इश्क़ था जो जान को तरदीद क्या दें मरना ही था इश्क़ था जो — Krishna Mishra

Ghazal

करूँँगा क्या मैं आख़िर ज़र्फ़ का ऐसे जवाँ होकर मुकर जाती है जब आवाज़ मेरी अब बयाँ होकर तो मेरी ही किसी ख़्वाहिश की ये मंज़िल रहा होगा मेरा रस्ता गुज़रता है अगर साक़ी यहाँ होकर कहूँ कैसे मैं दुनिया को मेरा महबूब अच्छा है मैं तो अब भी भटकता हूँ यहाँ होकर वहाँ होकर लुटा देता है सब सपने जो सारे शौक़ बच्चों पर ख़ुदा आता है धरती पर पिता होकर या माँ होकर मेरी जलती चिता के पास इक दीपक जला जाना तेरी खिड़की पे आऊँगा मैं इक जुगनू की जाँ होकर मुझे डर है कि रह जाऊँ न बस अख़बार में दबकर मुझे तो था कि मर कर भी मैं निकलूँ दास्ताँ होकर — Krishna Mishra