Subhash Ehsaas

Subhash Ehsaas

@subhashehsaas

Subhash Ehsaas shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Subhash Ehsaas's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

इस दफ़ा भी जश्न-ए-आज़ादी नहीं है इस दफ़ा भी हम किसी की क़ैद में हैं — Subhash Ehsaas
ये पता चला हमें तेरे इंतिज़ार में थोड़ी देर होने में कितनी देर लगती है — Subhash Ehsaas
कुछ नहीं है ये मोहब्बत कहने वालो सोच लो ये तुम को भी इक रोज़ ख़्वाबों में कोई लड़की मिलेगी — Subhash Ehsaas
बद-दुआ है या दुआ ये तो नहीं मालूम लेकिन तेरी औलादों को महबूबा तेरे जैसी मिलेगी — Subhash Ehsaas
बीस साल जी के ये ख़याल है तेरे लिए ख़ुद-कुशी से भी कहीं हराम है तू ज़िंदगी — Subhash Ehsaas
छोड़ने की कोई धमकी दे रहे हैं आप क्यूँ आप ख़ाली सोचने से जा चुके हैं जाइए — Subhash Ehsaas
सब ख़बर में आने की ख़ातिर जतन करते रहे हैं सिर को कोई कैमरे के पीछे सहलाता नहीं है — Subhash Ehsaas
बेवजह ही मर गया है वो किसी की याद में बुज़दिलों को इश्क़ से कुछ दूर होना चाहिए — Subhash Ehsaas
है 'सुभाष एहसास' की सोहबत में दुनिया कुछ अकड़ में है मगर झूठी नहीं है — Subhash Ehsaas
बुज़ुर्ग जा रहे हैं दुनिया छोड़ रफ़्ता रफ़्ता अब हमें भी काँधे के लिए पुकारता है गाँव देख — Subhash Ehsaas
राएगानी के अगर मानी समझने हैं तो आना बा'द तेरे तुझ को हर इक शय यहाँ उजड़ी मिलेगी — Subhash Ehsaas
हम किसी की मानते हैं ही नहीं है हमारे साथ में ये मसअला — Subhash Ehsaas
जीत होती ही नहीं है सच की अब पूरी दुनिया बन गई है कर्बला — Subhash Ehsaas
शाम को घर लौट के सब की तरह जाता नहीं है यार फ़ौजी है दिवाली पर भी घर आता नहीं है — Subhash Ehsaas
साथ में हैं कौन बंदे कौन हैं दुश्मन तुम्हारे बस नज़र भर देख कर के दो सफ़ों में बाँट देते — Subhash Ehsaas
आदमी तो आप बेशक हैं बड़े बलवान लेकिन ज़िंदगी तो आप की भी औरतों के हाथ में है — Subhash Ehsaas

Ghazal

दुनिया से इतना डरती हो जैसे तुम इक बच्ची हो हम ख़ुद को हम कहते हैं या'नी हम में तुम भी हो ऐसी बातों पर रोना तुम तो बिल्कुल भोली हो घर कर लेती हो दिल में बिल्कुल जादूगर सी हो बातें करती हो ख़ुद से ही थोड़ी पागल लड़की हो इतनी जज़्बाती हो तुम फिर तो मेरे जैसी हो कहती हैं रातें हम सेे जो तुम दिन से कहती हो झूठी दुनिया है और तुम कैसे इतनी सच्ची हो मरते हैं सब तुम पे जानाँ और तुम मुझ पे मरती हो ग़ालिब हो या मीर हो फिर कुछ भी ठुकरा देती हो सब आँखों में तुम हो बस ऐसा कैसे करती हो लड़ती हो जब मुझ सेे तुम कितनी प्यारी लगती हो हामी सब तब भरते हैं जब तुम हामी भरती हो — Subhash Ehsaas
कोई दरवाज़ा मिलेगा अब न ही खिड़की मिलेगी नफ़रतों के दौर में हर एक शय ऐसी मिलेगी कुछ नहीं है ये मोहब्बत कहने वालों सोच लो ये तुम को भी इक रोज़ ख़्वाबों में कोई लड़की मिलेगी बस तेरा साया ही हूँ मैं इस सेे ज़्यादा कुछ नहीं हूँ वैसे भी सागर किनारे थोड़ी तो मिट्टी मिलेगी तालियों की गड़गड़ाहट में कहाँ जादूगरी है जान जाओगे ये जब तुम सेे भी ख़ामोशी मिलेगी बद-दुआ है या दुआ ये तो नहीं मालूम लेकिन तेरी औलादों को महबूबा तेरे जैसी मिलेगी राएगानी के अगर मानी समझने हैं तो आना बा'द तेरे तुझ को हर इक शय यहाँ उजड़ी मिलेगी — Subhash Ehsaas
इस सफ़र में एक दम ही आम है तू ज़िंदगी कुछ नहीं है बस मेरी ग़ुलाम है तू ज़िंदगी आदमी के हिस्से में यहाँ पे आता कुछ नहीं सिर्फ़ इक बहुत बड़ा सा नाम है तू ज़िंदगी जानकार तेरे बारे में यही बताते हैं कि चिलचिलाती दोपहर की शाम है तू ज़िंदगी पूछते ही रह गए तेरा पता हयात हम जो मिला नहीं वो इक मक़ाम है तू ज़िंदगी तेरी आँखों की नमी थी मेरे नाम किंतु अब कोई और पी गया वो जाम है तू ज़िंदगी चुप हो जाते हैं बड़े बड़े भी तेरे सामने सरकशी ज़बान पे लगाम है तू ज़िंदगी बीस साल जी के ये ख़याल है तेरे लिए ख़ुद-कुशी से भी कहीं हराम है तू ज़िंदगी — Subhash Ehsaas