दुनिया से इतना डरती हो
जैसे तुम इक बच्ची हो
हम ख़ुद को हम कहते हैं
या'नी हम में तुम भी हो
ऐसी बातों पर रोना
तुम तो बिल्कुल भोली हो
घर कर लेती हो दिल में
बिल्कुल जादूगर सी हो
बातें करती हो ख़ुद से ही
थोड़ी पागल लड़की हो
इतनी जज़्बाती हो तुम
फिर तो मेरे जैसी हो
कहती हैं रातें हम से
जो तुम दिन से कहती हो
झूठी दुनिया है और तुम
कैसे इतनी सच्ची हो
मरते हैं सब तुम पे जानाँ
और तुम मुझ पे मरती हो
ग़ालिब हो या मीर हो फिर
कुछ भी ठुकरा देती हो
सब आँखों में तुम हो बस
ऐसा कैसे करती हो
लड़ती हो जब मुझ से तुम
कितनी प्यारी लगती हो
हामी सब तब भरते हैं
जब तुम हामी भरती हो
— Subhash Ehsaas















