तेरे अंदर नहीं है हिम्मत भी
लोग तो करते हैं बग़ावत भी
हम हैं आशिक़ नए ज़माने के
है ज़रूरत बदन भी उलफ़त भी
देख के ज़िंदा मुझ को बोली वो
है ख़ुशी और थोड़ी हैरत भी
ऐसे वैसों के मुँह नहीं लगते
और है ये बात तेरे बाबत भी
लौट के आई वो तो कह देंगे
अब नहीं हम को तेरी हसरत भी
— Subhash Ehsaas















