Vineet Aashna

Top 10 of Vineet Aashna

    ख़ुश रहते हैं हँस सकते हैं भोले भाले होते हैं
    वो जो शे'र नहीं कहते हैं क़िस्मत वाले होते हैं

    पीना अच्छी बात नहीं है आते हैं समझाने दोस्त
    और ढलते ही शाम उन्हें फिर हमीं सँभाले होते हैं
    Read Full
    Vineet Aashna
    10
    47 Likes
    या तो भरम बना रहे इतना ख़ुदा करे
    इनकार अपने होने से वरना ख़ुदा करे

    मुश्किल है मेरा काम तो मिल बाँटकर करें
    आधा करा दें राम जी आधा ख़ुदा करे
    Read Full
    Vineet Aashna
    9
    37 Likes
    माना कि मेरा जिस्म ये जूठा गिलास है
    लेकिन ये दिल तो आज भी कोरा गिलास है

    कितनी है कैसी मय है यही बात है बड़ी
    चाँदी या काँच का सही रहता गिलास है

    कुछ तिश्नगी भी रखनी थी जानाँ सँभाल के
    तुम ने हिफ़ाज़तों से जो रक्खा गिलास है

    पीने का लुत्फ़ है तभी जब ये रहे न इल्म
    तेरा गिलास है कि ये मेरा गिलास है

    क़ीमत तो मेरी प्यास की भी कम नहीं हुज़ूर
    ये और बात आप का महँगा गिलास है

    तुम को भी इस जहान का आ ही गया चलन
    पीने के बा'द तुम ने भी फेंका गिलास है

    मुँह से लगा मैं पी गया बोतल तो शोर क्यूँ
    शिद्दत की प्यास को कहाँ मिलता गिलास है

    दुनिया का मैं ज़रूर हूँ पर शाम ही तलक
    फिर उस के बा'द तो मिरी दुनिया गिलास है
    Read Full
    Vineet Aashna
    8
    1 Like
    ख़ुद को समेटने में थी इतनी अगर-मगर
    बिखरा पड़ा हूँ आज भी तेरे इधर-उधर

    अपनी कमी से कह दो कि शिद्दत से तो रहे
    देखो कि रह न जाए कहीं कुछ कसर-वसर

    इक रोज़ तुम भी तो ज़रा ख़ुद से निकल मिलो
    तय कर लिए हैं मैं ने तो सारे सफ़र-वफ़र

    नफ़रत तिरी या प्यार हो ग़म हो शराब हो
    मुमकिन नहीं है थोड़े में अपनी गुज़र-बसर

    तू क्या गई मैं हो गया हूँ सख़्त-जान माँ
    लगती नहीं है अब तो मुझे कुछ नज़र-वज़र

    मुद्दत से कुछ भी तो तेरी चलती नहीं ख़ुदा
    रक्खा तू कर जहान की भी कुछ ख़बर-वबर

    बस इश्क़ का है मारा तो कुछ शे'र कह दिए
    वर्ना है ‘आश्ना’ में कहाँ कुछ हुनर-वुनर
    Read Full
    Vineet Aashna
    7
    3 Likes
    रखें हैं सहरा जो इतने तो झील भी रक्खो
    कभी विसाल को थोड़ा तवील भी रक्खो

    उसे कहो कोई तस्वीर भेज दे अपनी
    जो जी रहे हो तो कोई दलील भी रक्खो

    न जाने कौन से अश'आर किस को चुभ जाएँ
    जो सच्चे शे'र हैं कहने वकील भी रक्खो

    तुम्हें भी चाहिए इज़्ज़त अगर ज़माने से
    तो अपने आप को थोड़ा ज़लील भी रक्खो

    तमाम लोगों की सरगर्मीयों का मौसम है
    जुनूँ के शहर में कोई सबील भी रखो

    उतार कर ये उदासी कभी तो टाँग सको
    किसी दिवाल पे इक ऐसी कील भी रक्खो

    बड़े मज़े की सवारी है दिल का ये टट्टू
    लगाम कस के रखो और ढील भी रक्खो

    ग़मों की सोहबतें अच्छी न फ़ासले अच्छे
    इन्हें हिसार में रक्खो फ़सील भी रक्खो
    Read Full
    Vineet Aashna
    6
    0 Likes
    फ़ैसला उस पार या इस पार होना चाहिए
    क्यूँ जुनून-ए-इश्क़ को मँझधार होना चाहिए

    फूल सारे ही चमन के दाद के हैं मुस्तहिक़
    इश्क़ आख़िर क्यूँ फ़क़त इक बार होना चाहिए
    इश्क़ का इज़हार इतना और अमल कुछ भी नहीं
    आप का तो नाम ही सरकार होना चाहिए

    मैं नहीं तो क्या हज़ारों और तारे हैं यहाँ
    क्यूँ किसी भी रात को बेज़ार होना चाहिए

    उम्र भर आँखों ने तेरे हिज्र में रोज़ा रखा
    ज़िंदगी की शाम है इफ़्तार होना चाहिए

    तुझ को माँगा जब दुआ में हँस के ये बोले ख़ुदा
    ज़िंदगी में कुछ न कुछ दुश्वार होना चाहिए

    'आश्ना' कुछ काम करते हो तो हो किस काम के
    तुम तो शाइ'र हो तुम्हें बे-कार होना चाहिए
    Read Full
    Vineet Aashna
    5
    1 Like
    या तिरी आरज़ू सा हो जाऊँ
    या तिरी आरज़ू का हो जाऊँ

    मिरे कानों में जो तू कुन कह दे
    मैं तसव्वुर सा तिरा हो जाऊँ

    मुझ से इक बार ज़रा मिल ऐसे
    मैं तिरे घर का पता हो जाऊँ

    तू भी आ जाना कहीं रख के बदन
    जिस्म से मैं भी जुदा हो जाऊँ

    तोड़ कर माटी ये मेरी फिर से
    यूँ बनाओ कि नया हो जाऊँ
    इश्क़ की रस्म यही है बाक़ी
    मैं भी इक बार ख़फ़ा हो जाऊँ

    आशनाई है सुख़न-गोई भी
    और कितना मैं बुरा हो जाऊँ
    Read Full
    Vineet Aashna
    4
    0 Likes
    अजब सी आज-कल मैं इक परेशानी में हूँ यारो
    यही मुश्किल मेरी है बस मैं आसानी में हूँ यारो

    मुझे उन झील सी आँखों में यूँ भी डूबना ही है
    न पूछो बारहा कितने में अब पानी में हूँ यारो

    न सूरत वस्ल की कोई न कोई हिज्र का ग़म है
    मैं अब के बार कुछ ऐसी ही वीरानी में हूँ यारो

    मुझे लगता था मुमकिन ही नहीं है उस के बिन जीना
    मैं ज़िंदा हूँ मगर मुद्दत से हैरानी में हूँ यारो

    बदन का पैरहन छोटा मुझे पड़ने लगा इतना
    मैं खुल कर साँस लेने को भी उर्यानी में हूँ यारो

    ख़ुदा ने रख दिया मुझ को उसी के दिल में जाने क्यूँ
    न बाहोँ में हूँ मैं जिस की न पेशानी में हूँ यारो

    उसी इक 'आशना' को ढूँढती हर पल मिरी आँखें
    मैं रहता रात-दिन जिस की निगहबानी में हूँ यारो
    Read Full
    Vineet Aashna
    3
    2 Likes
    सब ज़रूरत का तो सामान है घर में रहिए
    क्या हुआ गर कोई हलकान है घर में रहिए

    भीड़ में भी न थे सीने से लगाने वाले
    आज तो शहर ही वीरान है घर में रहिए

    साँस घुट जाएगी दीवारों के के अंदर इक दिन
    और सुनते हैं कि दरमान है घर में रहिए

    बंद हैं मंदिर ओ मस्जिद की दुकानें सारी
    आज बाज़ार ये सुनसान है घर में रहिए

    कल तलक मुल्क से बाहर जो किए देते थे
    अब तो उन का भी ये फ़रमान है घर में रहिए

    हर मरज़ में नहीं होती है सुहूलत इतनी
    भूक से मरना तो आसान है घर में रहिए

    क़ैद फिर क़ैद ही होती है मगर हस्ब-ए-हाल
    सब से बेहतर यही ज़िंदान है घर में रहिए

    आप दिल से मुझे बे-दख़्ल किए देते हैं
    अब तो सरकार का एलान है घर में रहिए

    उस की तस्वीर इन आँखों के लिए काफ़ी है
    और फिर मीर का दीवान है घर में रहिए
    Read Full
    Vineet Aashna
    2
    0 Likes
    सब ज़रूरत का तो सामान है घर में रहिए
    क्या हुआ गर कोई हलकान है घर में रहिए
    Vineet Aashna
    1
    22 Likes