देखा के गुल में तितलियाँ उलझी हुई,
बालों में जैसे उँगलियाँ उलझी हुई
ऐसे ख़ुदा ने 'इश्क़ को सुलझा दिया,
लड़के नहीं है लड़कियाँ उलझी हुई
क़ैदी निरीक्षण में सिपाही था फँसा,
दो में दिखी वो बेड़ियाँ उलझी हुई
जो भी थका वो लकड़ियों में सो गया,
ख़ुश है जिसे है लकड़ियाँ उलझी हुई
सूनी कलाई घर चलाती थी कभी,
अब हाथ में है चूड़ियाँ उलझी हुई
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