आ गई है दीवाली पर ख़ुशी नहीं होगी
हाँ दिये जलेंगे जब रौशनी नहीं होगी
दर्द घर बदलने का और दर बदलने का
होगा ग़म भी कम जब तक दोस्ती नहीं होगी
फ़ोन सुब्ह करती थी भेजती थी फ़ोटो भी
फ़ोटो अब नहीं आते खींचती नहीं होगी
फ़ोन जो दिलाया था हाँ ख़राब हो शायद
ऐसा हो नहीं सकता काटती नहीं होगी
ऐसे देख ही मत तू मेरी माँ भी ज़िंदा है
पंखे ग़ुस्सा हो जा पर ख़ुदकुशी नहीं होगी
मेरे दोस्त कहते हैं कुछ नया सुना 'सौरभ'
ग़म है ही नहीं तो अब शाइरी नहीं होगी
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