lagte hain kaise bankar sardaar dekhte hain | लगते हैं कैसे बनकर सरदार देखते हैं

  - Anis shah anis

लगते हैं कैसे बनकर सरदार देखते हैं
हम भी चलो पहन कर दस्तार देखते हैं

करके हम उन सेे दिल का इज़हार देखते हैं
होती है जीत अपनी या हार देखते हैं

वो चाहते हैं उनको हम तारे तोड़ लाऍं
करते हम उन सेे कितना वो प्यार देखते हैं

ऐसे चुभा रहे हैं वो नश्तर-ए-तग़ाफ़ुल
हम उनको देखते वो अख़बार देखते हैं

कोई नहीं जो संग-ए-बुनियाद देखता हो
आते हैं लोग जो भी मीनार देखते हैं

सब देखते हैं लेकिन है फ़र्क़ देखने में
वो शक्ल देखते हम किरदार देखते हैं

कुछ तो अनीस अपना अब फ़िक्र-ओ-फ़न बढ़ाओ
अहल-ए-सुख़न सुख़न में मेयार देखते हैं

  - Anis shah anis

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