जैसे सितारा कोई चले रात की तरफ़
मैं भागता था उस के ख़यालात की तरफ़
किस का सहारा मेरी मोहब्बत से ख़ास था
किस ने बढ़ाया हाथ तेरे हाथ की तरफ़
क्या चाहती हो चीख़ के रोने लगे कोई
सब खींच लेंगे तुम को सवालात की तरफ़
क्या इश्क़ में तुम्हें भी ज़माने की फ़िक्र है
क्या जा रहे हो तुम भी रिवायात की तरफ़?
उस का करम न आया अभी तक मेरी तरफ़
मैं आ गया ज़रूर इबादात की तरफ़
— Armaan khan















