सोचा नहीं कि क्यूँ मुझे नाकामियाँ मिलींजब अपने ही वजूद में सौ ख़ामियाँ मिलींतन्हाइयों से तंग था मैं पिछले कुछ दिनोंफिर एक दिन मुझे मेरी परछाइयाँ मिलीं— Armaan khan