मिरा दिल ग़म छुपाना चाहता है
मगर तुम से बताना चाहता है
मुझे अल्लाह ने बख़्शी है नेमत
वही नेमत ज़माना चाहता है
उठाऊँ हाथ माँगूँ मैं दुआएँ
ख़बर है क्या दिवाना चाहता है
मुझे कहता है तुम को छोड़ दूँगा
मुझे यूँ आज़माना चाहता है
जिसे हम ने सिखाई थी मोहब्बत
वही हम को भुलाना चाहता है
अभी तक लौट कर आया नहीं वो
वो मुझ से दूर जाना चाहता है
जिसे हम दिल की धड़कन कह रहे थे
वही हम को मिटाना चाहता है
चलो अब चल रहे हैं इस जहाँ से
बदन अपना ठिकाना चाहता है
हथेली काट ली थी जिस की ख़ातिर
वही अब छोड़ जाना चाहता है
— Arohi Tripathi















