मोहब्बत से हुए बीमार जानी
नहीं अच्छा नहीं है प्यार जानी
पकड़ में आ गए इस बार जानी
समझते हो कि हो हुश्यार जानी
बदलते थे हमेशा तुम बदन को
बहुत गंदे बड़े बदकार जानी
तुम्हें समझा रहे फिर भी न माने
रहे हो तुम बड़े मक्कार जानी
सजाया घर तुम्हारे 'इश्क़ में ही
मनाया भी नहीं त्यौहार जानी
तुम्हारे साथ फोटो है हमारी
मगर उस
में दिखे बेकार जानी
कभी लिखते नहीं अच्छी ग़ज़ल हम
तिरे जैसे नहीं शहकार जानी
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