किसी भी बात पर ख़ुशी नहीं हुई
ये ज़िंदगी है ख़ुद-कुशी नहीं हुई
ज़बाँ पे छा गई थी तेरे जाने से
मगर ये दिल में ख़ामुशी नहीं हुई
इलाज दिल के दर्द का मैं क्यूँ करूँ
है दर्द ऐसा ना-ख़ुशी नहीं हुई
सभी को आगे बढ़ना तू भी बढ़ गई
ये जानकर फ़रामुशी नहीं हुई
पिता की लाज रखने को हुई थी सो
ये शादी से उसे ख़ुशी नहीं हुई
— "Dharam" Barot















