कोई उम्दा शे'र हो जाए यही उम्मीद है
शे'र में कुछ और भी रहती छुपी उम्मीद है
कोई पूरी हो गई कोई अधूरी सी रही
ज़िंदगी में ऐसी हम सब की कोई उम्मीद है
जो लिखा है उसने वो होकर रहेगा सच यही
है न दुख मेरा न सुख हाँ ये सही उम्मीद है
शे'र मैंने कह दिया ये बाद उसके भी कोई
आपको लगता है कुछ बाक़ी रही उम्मीद है
ज्ञान अच्छा है मगर इतना नहीं अच्छा 'धरम'
ज़िंदगी में मेरे जीते जी मरी उम्मीद है
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