कोई कहता रहा था जोग इसको
किसीने फिर कहा था रोग इसको
ज़रा सा मुस्कुराके दर्द छलका
दिखावा कहते है कुछ लोग इसको
किसी इक पर नहीं रुकती नज़र ये
कहेंगे आप कैसे योग इसको
किसी का बिन लड़े ही हार जाना
कभी भी मत कहो संजोग इसको
किसी की याद में जीना धरम को
धरम फिर क्यूँ कहेगा सोग इसको
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