main yaadon se buna vo jaal hooñ dost | मैं यादों से बुना वो जाल हूँ दोस्त

  - "Dharam" Barot

मैं यादों से बुना वो जाल हूँ दोस्त
गया जो बीत मैं वो काल हूँ दोस्त

कहाँ पर बाँट ने से दर्द कम हो
बताना था मुझे बेहाल हूँ दोस्त

हवा का झोंका है साबित हुआ था
वो अक्सर कहती थी फ़िलहाल हूँ दोस्त

ज़रा सा मुस्कुरा के चुप रहा था
बना दूँ बिगड़े सुर वो ताल हूँ दोस्त

किताब-ए-ज़िंदगी का सार ये था
समझ ये आ गया कंगाल हूँ दोस्त

  - "Dharam" Barot

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