बनते बनते बात बिगड़ी थी हमारी
बोलने पर सच सज़ा मिलती है भारी
साथ होती रेस पर होते जुदा ट्रैक
मेरी ख़ुद ही ख़ुदस ही थी जंग जारी
हम नहीं किन्नर के जैसे तो अकेले
लड़ झगड़ कर साथ है नर और नारी
'इश्क़ में डर रहता है दिल टूट ने का
ज़िंदगी भर साथ में रहती है यारी
वार इतने तंज़ से करते हो मुझ पर
इससे अच्छा है मेरी दे दो सुपारी
उड़ता उतना ही हूँ जितनी उसकी मर्ज़ी
खेल को अच्छे से खेला था मदारी
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