जाँ जाती है दिल दुखता है
जब तुम से कोई मिलता है
मत कर अपना पागल मुझ को
इस पागल से घर चलता है
अच्छा भी हो सस्ता भी हो
ऐसा दिल अब कम मिलता है
तू ना कर अब वा'दा हम सें
इन वादों से डर लगता है
सुन ओ दिल ले जाने वाले
तू मुझ को क़ातिल लगता है
अच्छा ख़ासा लड़का है वो
जाने सब को क्यूँ खलता है
आ सकती हो अब भी वापस
सब को मौक़ा' कब मिलता है
— Govind kumar















