mohabbat men fana hone se pahle sochte the ham | मोहब्बत में फ़ना होने से पहले सोचते थे हम

  - Hasan Raqim

मोहब्बत में फ़ना होने से पहले सोचते थे हम
कि अपने आप को ता'उम्र ही तन्हा रखेंगे हम

मिले छाते मुझे उनके घरों में भी जो कहते थे,
अगर बारिश हुई तो भीगने वालों में होंगे हम

बिछड़ने के इरादे से वो हम सेे मिलने आया था,
ख़ुशी किस बात की होती हमें क्यूँँ मुस्कुराते हम

बहुत आसान हो जाता जहाँ में एक-जुट रहना,
अगर हर आदमी के दर्द को अपना समझते हम

कहाँ हैं लोग जो हर ग़म के टल जाने पे कहते थे,
मुसलसल ज़िंदगी भर अब तुम्हारा साथ देंगे हम

  - Hasan Raqim

Aadmi Shayari

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