तमाम चाहा मगर वो मिरा हुआ ही नहींवो जिस का अक्स नज़र से जुदा हुआ ही नहींवो मेरे बा'द सभी का ही हो गया देखोमैं जिस के बा'द किसी और का हुआ ही नहींअदालतें भी तो उस ने ख़रीद रक्खी थीहमारे हक़ में कभी फ़ैसला हुआ ही नहीं— Hasan Raqim