यूँँ ज़िंदगी में अब किसी से कोई इल्तिजा नहीं,
वो मिल गया तो ठीक है नहीं तो कुछ गिला नहीं
मेरे लिए तो तुम भी इस जहान की तरह ही हो,
तुम्हें भी मेरी ग़म ख़ुशी का कुछ अता पता नहीं
तमाम हैं बिमारियाँ मगर तुम्हें हुआ है 'इश्क़,
तो अब तुम्हें ज़रूरत ए दुआ ही है दवा नहीं
तेरे लिए ये सच है ,चाँद तक भी जाएगा कोई
अगर वो मैं नहीं भी बन सका तो कुछ बुरा नहीं
नहीं बुला सकोगे इस दफ़ा भी तुम तो क्या हुआ,
तुम्हारे जन्मदिन पे मसअला ये कुछ नया नहीं
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