har ik nazar ko teri or fer rakha hai | हर इक नज़र को तेरी ओर फेर रक्खा है

  - Hasan Raqim

हर इक नज़र को तेरी ओर फेर रक्खा है
तेरी हँसी ने सभी कुछ बिखेर रक्खा है

मैं तेरी याद दिलाता हूँ इस तरह ख़ुद को,
की दिल को तेरी ही यादों से सेर रक्खा है

हमारे नाम कभी तुमने भी लिखे होंगे,
कहो कहाँ पे ख़तों का वो ढेर रक्खा है

कहा गया था कि घिर जाओ अच्छे लोगों से,
सो मैंने ख़ुद को ख़ुदी से ही घेर रक्खा है

जिसे कमाने में आराम चाहते हो न तुम,
वो तख़्तो ताज तो मेहनत के ज़ेर रक्खा है

  - Hasan Raqim

Berozgari Shayari

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