meri baaton par tumhaara muskurana theek hai | मेरी बातों पर तुम्हारा मुस्कुराना ठीक है

  - Hasan Raqim

मेरी बातों पर तुम्हारा मुस्कुराना ठीक है
मुझपे मुझ सेे दूर रहकर हक़ जताना ठीक है

मुझ सेे मिलने फिर नहीं आ पाओगे, मसरूफ़ हो
मान लेते हैं तुम्हारा ये बहाना ठीक है

एक ज़माने से तुम्हारे 'इश्क़ में मैं था फ़ना
एक ज़माने से तुम्हारा ये फसाना ठीक है

बिन तुम्हारे तो मुझे अपनी ख़बर होती नहीं
ये न मुझ सेे तुम कहो की दूर जाना ठीक है

ये भी कैसी दिल्लगी की अब तलक अफ़सोस है
लोग कहते थे के "राक़िम" दिल लगाना ठीक है

  - Hasan Raqim

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